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Shashi Tharoor


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Posted On: 6 Jan, 2010  
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अपने पर भरोसा है तो दांव लगा ले

Posted On: 30 Dec, 2009  
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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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Hello world!

Posted On: 30 Dec, 2009  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

देशी-विदेशी गर्ल फ्रैंड, तीसरी शादी की तय्यारी,थरूर जी की ऊर्जा देश के लिए नहीं अपने आयाशी में ही है, उनका सारा कल्चर विदेशी है.-विदेश सेवा, सयुंक्त राष्ट्र महासचिव की जंग, विदेश राज्य मंत्रालय, भारत सर्कार का मंत्री होने की कोई बात उनमे नहीं है," , जब इकोनोमी क्लास के लोग भेड़-बकरी है तो देश की जनता तो कीड़े-मकोड़े से जादा नहीं होगी इन्क्की नजर में, ऐसा मंत्री विदेश में भारत का क्या प्रितिनीधित्व करेगा?, इनकी तर नहीं करो बल्कि औकात दिखाओ, मंत्री पद जाने के बाद भी ये लोग सात पुश्तो तक अय्याशी का सामान जुटाए बैठे है.अपनी इमेज बदलो ठारूर सब वो भी सच्ची वाली, अब कुछ करके दिखाओ, देशवासी भुलक्कड़ है सब भूल जायेगे."वन्देमातरम"(शिब्बू आर्य-भारत स्वाभिमान)

के द्वारा:

थरूर जी, आप सही कह रहे है इंसान में कल्पना शक्ति का होना बहुत जरुरी है. आपके ब्लॉग को पढ़कर एक बहुत बड़ी ख़ुशी ये भी हो रही है की जागरण के माध्यम से हम आपनी बात आप तक सीधे पंहुचा सकते है. हमारा देश भारत हर दिशा में तरक्की कर रहा है और तेजी से विकास हो रहा है. जनसँख्या के ज्यादा होने की वजह से विकास की दर धीमी पड़ जाती है या कभी कभी विकास के ऊपर जनसँख्या हावी हो जाती है. नवीनतम तकनीकी के प्रचार से आपसी विचारो का आदान प्रदान और जानकारी देने लेने में बेशक बहुत ही सहूलियत हुई है और इसे विकास ही कहेंगे परन्तु ये विकास ये तकनिकी केवल शेहरो तक ही सिमित है. गाँव में अभी भी गरीबी और अज्ञानता का वही आलम है जो पहले था. अभी भी भारत के गाँव का किसान अपने दो जून की रोटी जुटाने में असफल है. गाँव में तकनिकी का विकास क्यों नहीं हो रहा है? कहा जा रहा सरकार द्वारा आवंटित पैसा ? क्यों नहीं लग रहा वो गाँव के विकास में.? क्यों सरकार मूक बन कर सब देख रही है और चोर अपनी झोलिया भर रहे है. सरकारी खजाने से जहा गाँव का विकास होना चाहिए वही शेहरो में तानाशाहों की कोठिया बन रही है. बड़ी विडम्बना है हमारे देश की. कल्पना का सागर बहुत बड़ा है... आखों में सपनो की कमी भी नहीं है .....होसले भी बुलंदियों पर है .....इन्ही हथियारों के साथ जब एक युवा अपनी रोजी रोटी की लड़ाई लड़ना शुरू करता है तो सफलता कुछ लोगो को ही हासिल होती है. अगर भ्रस्टाचार नाम की बीमारी हमारे सिस्टम से ख़तम हो जाये और हर भारतवासी अपने अधिकारों का सही तरह से उपयोग कर सके तो कोई शक नहीं की हमारा देश बहुत जल्दी विकसित देशो की सूचि में होगा. पालिटिक्स में नए चेहरे कुछ करने की पूरी कोशिश कर रहे है मगर पुराने मगरमच्छ अपना काम वैसे ही कर रहे है. हमारे देश के हर आयु के वर्ग को अपने अधिकारों को समझाना होगा भ्रस्टाचार को दूर करना होगा. जनता से अनुरोध है की इन्टरनेट, और आधुनिक तकनीको को हथियार बनाकर उसका सही उपयोग करके अपने देश और अपने भविष्य के सपनो को पूरा कीजिये. जब अपना पेट भर जाये तो कभी कभी दुसरो के बारे में भी सोचिये. अगर आपके पास ज्ञान है तो उसे बाटिये. अपने आस पास के लोगो को मार्ग दर्शन कीजिये. शरद पाण्डेय sharadkpandey@googlemail.com

के द्वारा:

शशी थरुर जी आपने लिखा है कि नये और पुराने नेत़त्व के परसेप्सलन मे अन्तर आ गया है सही प्रतीत नही होता है। मुझे लगता है कि पुराना नेत़त्व नये नेत़त्व से ज्या्दा संबेदनशील था। आज आप हवाई यात्रा के इकोनमी क्लानस को भेड बकरी क्ला‍स कहते हैं। जहां यदि गांव मे एक हेलीकाप्टार उतर जाये तो उसे देखने के लिये कई किलोमीटर से लोग आ जाते हैं। शायद गांव के 99;99 प्रतशित लोग नजदीक से हवाई जहाज नही देखें है हवां मे उड रहे हवाई जहाज को लोग आखों से ओझल होने तक देखते रहते हो वही का एक युवा नेता वायुयान के इकोनमी क्लास मे यात्रा करने वाले को भेडबकरी कहता हो कम से कम पुराने नेताओं मे यह मानसिकता नही थी। आप युवा है आप भारत की शेष विश्वं से तुलना कर सकते हैं आप जानते है कि भारत जवाने हो रहा है। अगले कुछ वषों मे भारत की जनसंख्‍या का बडा हिस्सा युवकों का होगा। एक नदी पर बांध बनाकर पानी रोककर झील बना दे। झील के पानी मे वहुत उर्जा है चाहे तो उसे नहरों के माध्यम से खेत की सिचाई के लियें प्रयोग करे और यदि आप उसका प्रयोग सिचाई के लिये नही करेगें तो वह एक दिन बांध को तोड देगा और सैलाब लायेगा फिर कोई युवा नेत़त्व से नही बचा पयेगा। आज की युवा होती पीढी यदि इसी प्रकार दिशाहीन वनी रही तो निश्चित ही यही युवा नक्सली बनेगा आतंकवादी बनेगा तमाम असंवैधानिक कार्य करेगा।

के द्वारा:

थरुर जी आपका लेख अच्छा है लेकिन आपने जो लि‍खा है वह भारतीय राजनीति मे कही दि‍ख नही रहा है। भारतीय राजनीति ने विगत अनुभवों से कुछ नही सीखा है जहां एक ओर विदेश सचिव भारत सरकार कह रहे है कि नक्सनली 2050 तक भारत पर राज करने की रणनीति पर चल रहे है और उनके द्वारा कब्जासइग्‍ गई भूमि को मुक्तण करने मे कई वर्ष लग सकते है। ऐसी स्थिति मे केन्द्रह मे सहभागी एक पार्टी द्वारा नक्सकलियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही से परहेज किया जा रहा है वह भी रानैतिक लाभ के लिये। तो क्याय हम कह सकते है कि हमने इतिहास से कुछ सीखा। क्याभ यही गलती इन्दिरा जी ने भिंडरवाले के विषय मे नही की थी। क्या् राजनीतिक नेता नक्साली समस्या को नासूर नही बना रहे है। आप सोचें और विचार करें कि पूर्व और वर्तमान राजनैतिक नेत़त्वे मे क्याे फर्क है। शायद आप वैचारिक स्तमर पर कोई अन्त्र नही पायेगें। यही गलती आपकी पार्टी ने महाराष्ट् मे की थी। आपका नेत़त्व‍ तो युवा है फिर वही गलती आपके नेत़त्वम से कैसे हो गई।

के द्वारा:

शशि थरूर जी अभिवादन, होली की शुभकामनाये. प्रेरक ब्लॉग लिखा है. धन्यवाद. यदि बीजेपी के नए अद्ध्यक्ष को युवा कहा जा सकता है तो आप स्वयं को युवा क्यों नहीं कह सकते? आपके बारे में एक दो बार पढ़ा है, बहुत प्रेरणा मिलती है. आपका विदेश सेवा का चुनौतीपूर्ण कार्यकाल युवाओ के लिए खासा रोमांचकारी है. एक बात समझ में नहीं आती की अक्सर आपके बोलने पर विवाद क्यों हो जाता है? हर वक्त कुछ नया कुछ बेहतर करने की जद्दोजहद दिमाग में चलती रहनी चाहिए. कल्पना होगी तो रंग खुद ब खुद आ जाएंगे. यह बेहद प्रेरक है. पहले की लीडरशिप रूरल इंडिया से कहीं बेहतर तरीके से कनेक्ट करती थी. यह बिलकुल सही है. जरुरत है की आज आप जैसे लोग आगे आये और वास्तविक इंडिया को आगे ले जाए. जड़ों से जुड़ा रहकर टेक्नोलॉजी का बेहतर उपयोग हमें कहाँ से कहाँ ले जा सकता है इसकी कल्पना भर नहीं होनी चाहिए. ऐसा करने के लिए लीडरशिप में ईमानदारी की जरुरत है. इतना करने पर हमें खुद पर भरोसा हासिल होगा तो दाव अपने आप ही लग जायेगा. और फिर उस दाव को हम ही जीतेंगे. धन्यवाद.

के द्वारा:




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